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मिशन कश्मीर


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प्रस्तावना


हिमालय की गोद में बसा कश्मीर अपनी प्राकृतिक और नैसर्गिक सौन्दर्य के लिए दुनिया भर में अपना एक ख़ास मुकाम रखता है।*दोस्तों जब बात कश्मीर की होती है तो अनायास ही आंखों के सामने शांत झीलों और बर्फीली वादियों का खूबसूरत नजारा तैर जाता है यही तो है कश्मीर , धरती पर स्वर्ग किसी ने सच ही कहा था
" गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त हमी अस्तो हमी अस्तो हमी अस्त " अर्थात धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यही हैं।



खूबसूरत बर्फीली वादियां , आसमान मे सीना ताने खड़ी ऊंचीऊंची पहाडि़यां, घाटियों के बीच में कल कल करती बहती झीलें, झाडि़यों से भरे जंगल, रंग बिरंगे फूलों से घिरी पगडंडियां, ऐसा प्रतीत कराती हैं जैसे यह स्वप्निल स्थल हो।


सुखन सूफ़ियाना, हुनर का खज़ाना
अजानों से भजनों का रिश्ता पुराना
ये पीरों, फ़कीरों का है आशियाना
यहाँ सर झुकाती है कुदरत भी आकर
है कश्मीर धरती पे जन्नत का मंज़र



कश्मीर भारत के मुकुट के समान है जो हर मौसम में अपना रंग बदलता है ।

पहाड़ों के जिस्मों पे बर्फ़ों की चादर
चिनारों के पत्तों पे शबनम के बिस्तर
हसीं वादियों में महकती है केसर
कहीं झिलमिलाते हैं झीलों के जेवर
है कश्मीर धरती पे जन्नत का मंज़र




धरती की यह जन्नत अपने सीने मे होने वाले हलचल से बिलख रही है । कभी उग्रवादी और दहशतगर्द तो कभी इसके अपने ही लोग इस स्वर्ग को मलिन कर दे रहे हैं । इसके लाल की छलनी कर देते हैं गोलियों से सीना और इस स्वर्ग की पनाह में रहने वाले भोले भाले और मासूम नागरिक हर पल नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हैं ।

आइए चलते हैं एक ऐसी ही कहानी की ओर जिसमें आपको बहुत कुछ दिखाया गया है इस स्वर्ग के बारे में और स्वर्ग में चल रहे नरकिय तांडव के बारे में।


ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू
मैं जहाँ रहूँ जहाँ में याद रहे तू







_________________________________________________


कहानी पूर्ण रुप से काल्पनिक है और सारे किरदार मनगढ़ंत हैं।


शुक्रिया किड्डू खूबसूरत बैन्नर के लिये
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Last edited by ishikaaa : 4 Weeks Ago at 02:54 PM.

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1 जनवरी 2017





कश्मीर को यूंही धरती का स्वर्ग नहीं कहा जाता है बर्फीली वादियों पर जब सूरज की किरणें पकड़ पड़ती हैं तो सोने सी सुनहरी आभा चारों तरफ वादियों मे फैल जाती है।



इसी कश्मीर के दिल गुलमर्ग की पनाहों मे बसा था एक छोटा सा गाव , जो स्वर्ग से भी खूबसूरत नैसर्गिक नजारोँ से लबरेज़ है ।
खूबसूरत देवदार के वृक्ष और बर्फीली खूबसूरत वादियां आंखों को बड़ा ही सुकून देती हैं । यह सुंदर नजारे यहाँ छोड़ कहीं भी नहीं मिल सकता है। ऐसे ही नहीं कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। पर यह गाव पडोसी मुल्क के बौर्डर पर स्थित होने की वजह से यहाँ सेना और खुराफ़ाती तत्वों का भी जमावड़ा सारे साल रह्ता है ।


छोटा सा खुशहाल गांव जिसकी छवि शायद सभी देखते हैं गांव के मुखिया अफजल अहमद निहायत ही शरीफ और उसूलों वाले इंसान है । सारे गांव में ऐसा कोई नहीं है जो कभी उनके लिए गलत शब्द बोलता हो । उनकी कोई औलाद नहीं है और आज उनके घर जश्न का माहौल है क्योंकि उनकी दूर की रिश्तेदार आयत आज से उनके यहां रहने आ रही है।




सारा गांव लजीज पकवानों की सुगंध से महक उठा है । मुखिया जी के घर सभी का आना जाना है इसी वजह से सब कई बार पूंछ चुके हैं कि बिटिया आई या नहीं। मुखिया जी ने आयत को लाने का जिम्मा अपने खराब स्वास्थ्य की वजह से अपने एक सबसे विश्वस्त बदले समीर को दिया है । मुखिया जी के घर से थोड़ी ही दूर स्थित है उसकी किराने की दुकान मुनाफा भी अच्छा हो जाता है । सबसे खास बात समीर के सिवा किसी को कार चलानी ढंग से नही आती है । समीर के सर पर बड़ो का सहारा नहीं है तो मुखिया जी से उसका लगाव बचपन से ही बहुत गहरा है ।




समीर 6 फुट लंबा , अच्छा खासा चौड़ा और सांवली रंगत का लड़का है , जिसकी आंखों में रूमानी सपने पलते हैं । वह इस गांव का सबसे बड़ा आदमी बनना चाहता है और यह बात उसने कई बार हंसी हंसी में मुखिया जी से भी कही है । मुखिया जी ने उसे यही सलाह दी कि बड़ा आदमी से बनने से अच्छा है कि अच्छा इंसान बनो ।



मुखिया जी द्वारा निर्देशित समय से आधे घन्टे देर से समीर गुलमर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचा और परेशान सा रेलगाड़ी के आने के वक्त का जायेज़ा लेने लगा । मुखिया जी ने जब से समीर को आयत की तस्वीर दिखाई थी तब से बस वो उसे देखने के लिये बेचैन था । उसे यकिन नही हो रहा था की हकिकत मे भी परियां होती हैं ।


समीर हर तरफ बेचैनी से देख रहा था तभी अचानक से सामने गुलाबी सलवार कमीज में एक निहायत ही खूबसूरत लड़की बार-बार अपनी घड़ी देखती हुई दिखी । उसे देखकर समीर के दिल मे धड़कनो का हल्ला होने लगा । वो उस लड़की की ओर दौड़ पड़ा ।

समीर -- आप आयत जी है ना ?



आयत -- जी हां मै ही आयत हूँ । मैंने आपको पहचाना नहीं ।



समीर -- मुखिया जी ने मुझे आपको लेने के लिए भेजा है ।



आयत -- शुक्र है खुदा का ! मुझे तो लग रहा था कि वो भूल ही गए किसी को भेजना।

समीर मंत्रमुग्ध सा आयत को निहार रहा था। आयत ने एक बार तो नजरअंदाज करने की कोशिश की , फिर मुंह टेढ़ा करते हुए बोली ,



आयत -- घर चले या फिर यहीं खड़े रहने का इरादा है ?



समीर -- हा हा चलते हैं ना, चलिए बाहर कार खड़ी हुई है।

समीर आयत को लेकर गुलमर्ग से गांव रवाना हो गया। आयत पहली बार कश्मीर आई थी । उसकी आंखें यहां के नैसर्गिक नजारों को देख कर और भी हसीन हो गई थी । वह बड़ी बेचैनी से कार की खिड़की से बाहर देख रही थी जैसे हर एक नजारे को आंखों ही आंखों से पी लेना चाहती थी।



समीर -- इससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत है हमारा गाँव ।



आयत -- अरे वाह चलिए देख लेते हैं।



समीर -- वैसे आप यहां कितने दिनों के लिए आए हैं ।



आयत -- जी अब यही रहने का इरादा है ।



समीर -- यह तो बहुत अच्छी बात है।




आयत -- मुझे पता है । वैसे आपके गांव में कोई स्कूल है ना जिसमें एक अंग्रेजी शिक्षिका की आवश्यकता थी मैं ठहरी बेरोजगार मुखिया जी ने सूचना दी तो मै आ गयी मैं अपना बोरिया बिस्तर समेट कर ।



समीर -- यह तो बहुत अच्छी बात है हमारे गांव के बच्चों को आपके जैसी होनहार अध्यापिका मिल जाएगी इससे ज्यादा खुशी की बात क्या हो सकती है ।

बातों ही बातों में सफर कब कट गया पता ही नहीं चला । ढाई - 3 घंटे के सफर के बाद समीर आयत को लेकर मुखिया जी के घर पहुंच गए । मुखिया जी के घर में भी जैसे मेला लग गया । सभी आयत से मिलने आये ।


आयत जल्दी ही गांव के माहौल में घुल मिल गई । उसे सभी मानने लगे थे क्योंकि उसका नेचर बहुत ही प्यारा , नेक और मिलनसार था। गांव के बच्चे ही नही बड़े भी आयत की बहुत रिस्पेक्ट करते थे क्योंकि आयत आई तो बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने थी पर वह बड़ों को भी पढ़ाने लगी थी । कुल मिलाकर कुछ ही दिन में सभी के लिए खास बन गई थी वह और सबसे ज्यादा खास समीर के लिए।



समीर का नियम बन चुका था , सुबह आयत के घर जब दूध पहुंचाने जाता था और शाम को जब दुकान बंद करके घर जाता था तो एक बार मुखिया जी से नमस्कार करने जरूर जाता था , मकसद सिर्फ आयत का दीदार करना होता था। आयत को भी सब कुछ पता था । वह समीर से मुस्कराकर मिलती थी । समीर का छोटा भाई बंटू आयत का स्टूडेंट था । बन्टू के बहाने से भी समीर आयत को मिलने आता ही रह्ता था ।
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Last edited by ishikaaa : 4 Weeks Ago at 02:36 AM.

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10 जुलाई 2017




रोज की तरह एक बेहद हसीन सुबह। सभी अपने काम पर लगे हुए थे । लगभग 11:00 बजे के करीब जिस वक्त आयत अपने स्कूल में पढ़ा रही थी । अचानक ही पूरा वातावरण गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा । सारे बच्चे भयभीत होकर आयत के पीछे छिप गये । बच्चों के मासूम चेहरे पर मौत की दहशत साफ नजर आ रही थी । गजब की बहादुरी दिखाई आयत ने । उसने सारे बच्चों को महफूज कमरे के कोने में बैठा दिया ।



आयत की मुस्तैदी देख कर लग नहीं रहा था कि इस माहौल से उसका पाला पहली बार पड़ा है । उसने झट से कमरे के दरवाजे को बंद किया । वह लगातर सभी बच्चों को सांत्वना देती रही । गोलियों की आवाज लगातार बढ़ती जा रही थी। अब सेना की गाड़ियों की आवाज भी आना शुरू हो चुकी थी । आयत ने बच्चों को समझने की गरज से कहा ,



आयत -- बच्चों घबराने की कोई बात नहीं है । सेना वाले आ गए हैं । अब हम महफूज हैं ।

आयत ने तो भरोसा दिलाया पर बच्चों की बातों ने आयत के सोच की धज्जियां उड़ा दी।



बच्चे -- हमको तो फौज वालों से ही ज्यादा खतरा है मैडम जी ।

बच्चों के चेहरे का खौफ बढता जा रहा था ।



आयत -- यह किस तरीके की बातें कर रहे हो तुम लोग। फ़ौज हमारे लिए है । हमारी हिफाजत के लिए है । वह हमारे भले के लिए काम करते हैं । फौजी बॉर्डर पर रात दिन जागता है तभी तो हम चैन की नींद सोते हैं। तुम्हारे दिमाग में ये बात किसने भर दी की हमें फौजियों से खतरा होता है।



बन्टू -- मैडम यह सब कुछ फौजियों की वजह से ही तो होता है । फौजी हम लोगों को जानबूझकर मारते हैं । फौजी हमारे भले के लिए नहीं है । हमें फौजियों को गाव से वापस भेजना है ।



आयत -- नहीं बन्टू ये देश ,ये गांव जितना तुम्हारा है उतना फौजियों का भी है । ऐसे कैसे सोच सकते हो कि तुम वह तुम्हारे भले के लिए नहीं काम करते हैं । वो लोग भी हम जैसे इन्सान है जो सीने पर सीधे गोलियां खाते हैं , मात्र तुम्हारे लिए, अमन-चैन लाने के लिए । तुम लोगो को ये सब कौन सिखाता है ।

बच्चे आयत की बात सुन कर भी लगातर कहते रह्ते हैं की सेना वालों को देखते ही रास्ता बदल देना चाहिए । यह लोग राक्षस होते हैं और कभी भी गोली चला देते हैं ।आयत को बहुत तकलीफ होती है ये बातें सुन कर ।



आयत -- दुख की बात है बच्चों कि तुम लोगों को इतनी गलत तालीम दी गई है। ऐसा कुछ भी नहीं है , सेना का हर जवान अपनी जान हथेली पर लेकर मौत से बिना सोचे समझे टकरा जाता है सिर्फ इसलिए जिससे हम जैसे नागरिक को चैन और अमन की जिंदगी हासिल हो । सेना वालों को गलत कहना तो भलमनसाहत को गाली देने जैसा हुआ ।

बच्चों का कोमल मन मिट्टी के घड़े समां होता है । उसे अपनी बातों से कोई भी रूप दिया जा सकता है । आयत की बात सुन सारे बच्चे बोल उठे ।



बन्टू और बच्चे -- ठीक है मैडम अब से हम ऐसा नहीं कहेंगे ।

आयत का चेहरा उतर चुका था क्योंकि आयत को सच्चाई पता थी । इन बच्चों की तरह उसके कान किसी ने नहीं भरे थे। वह जानती थी दहशतगर्द और फौज के लोगों में क्या अंतर क्या होता है । कुछ ही देर के बाद कर्फ्यू अनाउंस होने लगा । सेना की एक गाड़ी स्कूल के सामने आकर रुकी ।





दो गाडियाँ थी । आगे वाली गाड़ी से सेना का जवान उतरा । गोलियों से बचते हुये वह तेज कदमों से स्कूल के गेट की तरफ बढ़ गया । दरवाजा खटखटाते हुये वो लगातर " कोई है क्या अन्दर " पूंछ भी रहा था । आयत ने डरते-डरते दरवाजा खोला तो उसने कहा ,



फ़ौजी -- मैं आप सभी को हिफाजत से आप सभी के घर छोड़ने छोड़ने के लिए आया हूं । चलिए कतार बनाकर वैन में बैठ जाईए । बाहर के हालात ठीक नहीं है अगर कर्फ्यू लगने तक आप लोग यही रहे तो शायद यही पर फस कर रह जाएंगे क्योंकि लगता नहीं कि आज कर्फ्यू में कोई छूट मिलने वाली है।

आयत के चेहरे पर उसे देख कर तसल्ली आ गयी थी । बन्टू ने सेना के जवान का नाम पढा तो आयत ने उसकी ओर बढ़े विश्वास की नजरों से देखा और बच्चों को बच्चों को लेकर वैन में सवार हो गई । वैन तेजी से मुखिया जी के घर की ओर चल पड़ी । गोलियों की आवाज से लगातार तेज़ हो रही थी और अब तो मोर्टार भी फेंके जाने लगे थे । बच्चों की हालत डर के कारण बहुत खरब थी पर आयात बच्चों को बहुत अच्छी तरीके से संभाल रही थी ।


मुखिया जी के घर पर पहुंचते ही सभी बच्चों को मुखिया जी के घर उतार दिया गया और सेना का जवान वापस गाड़ी में बैठने जाने ही वाला था कि अचानक एक पत्थर आकर जोर से उसके माथे पर लगा। सेना के जवान अपनी बन्दूक के साथ तैनात हो गये । आयत गुस्से चीख पड़ी । तभी ना जाने किधर से कई नकाब धारी लड़के दौड़ते हुए आए और सेना की गाड़ी पर पत्थर और डंडों से वार करने लगे। सेना वाले उनको पीछे हटने के लिये बोल रहे थे पर कोई ऐक्शन नही ले रहे थे ।



आयत सेना के जवान के सामने आकर खड़ी हो गई थी और जोर से चिल्लाकर बोली ,


आयत -- हट जाओ इन्होंने हमारी जान बचाई है । यह ना होते तो बच्चे कैसे घर आते ।

आयत की बात पूरी नही हुई थी तभी एक पत्थर आयत के माथे पर लगा।आयत को पत्थर लगते ही सेना का जवान गुस्से मे आ गया और उसने आंसू गैस छोड़ने के आदेश दे दिये । जिसे देखकर समीर परेशान हो गया यह पत्थर इत्तफाकन समीर ने ही मारा था पर वह पत्थर सेना के जवान को ना लगकर आयात के माथे पर जा लगा था ।


आयत ने नहीं देखा था समीर को पत्थर मारते हुए । समीर भागते हुए आयात के पास आया और बोला ,


समीर -- आयत अंदर चलो तुम्हें फर्स्ट एड की जरूरत है , तुमको चोट लगी है काफी खून बह रहा है ।

आयत ने गुस्से से अंदर जाने से मना कर दिया और बोली ,



आयत -- नहीं मैं अंदर नहीं जाऊंगी । मारिए पत्थर और जान से मार डालिए मुझे । कहां का न्याय है ये ? एक तो ये अपनी जान पर खेलकर सारे बच्चों को बचाकर यहां पर लेकर आए और आप लोग इन्हीं को मार रहे हैं।

मुखिया जी ने भी आयत का समर्थन किया,



मुखिया जी -- सही कह रही है आयत , हट जाइए पीछे आप लोग । फेंक दीजिए अपना डंडे और पत्थर , लेकिन किसी ने नहीं सुना सिर्फ समीर ऐसा था जिसने पत्थर फेंक दिया था बाकी उसके अलावा किसी ने भी बात नहीं सुनी । सेना वाले चले गये थे पर समीर परेशान था की आयत की निगाहों में उसने सेना के जवान के लिए कुछ ज्यादा ही चाहत देख ली थी । इतना प्यार तो उसने कभी अपने लिए भी नहीं देखा था आयत की आंखों में। समीर को गुस्सा भी आ रहा था और दुख भी हो रहा था उसके जहन में बार बार रणबीर शेखावत नाम घूम रहा था । यही नाम था सेना के जवान का जिसके सामने ढाल के रूप मे आयत खड़ी हुई थी ।










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16 दिसम्बर 2017





5 - 6 माहीनो की शान्ति एक झटके मे भंग हो गयी थी । किसी ने सोचा भी नही था कि दहशत कायम रखने के लिये इतने खौफनाक काम को अंजाम दे बैठेंगे कुछ लोग । शायद इसी लिये इनको दहशतगर्त कहा जता है ।


सरेआम खेल के मैदान से बंटू और दो और लड़कों को जीप में बिठाकर लोगों पर गोलियां बरसाते हुए वे लोग उठा ले गए । कुछ नहीं कर सका कोई सिवा देखते रहने के । बन्टू के अपहरण से समीर की हालत बहुत खराब हो गई थी । कई बार तो बेसुध हो चुका था । उसके परिवार में यही एक इकलौता सदस्य था उसका छोटा भाई बंटू जो अगवा कर लिया गया था ।



सारे गांव में मौत का सन्नाटा छा चुका था। मुखिया जी के घर पर कुछ वयोवृद्ध और बुद्धिमान लोगों की मंडली बैठी हुई थी जो इस बारे में विचार विमर्श कर रहे थे । समीर ने खुद को अपने घर में बंद कर रखा था । बच्चों को अपहृत हुये 3दिन बीत गये थे । कोई सुराग नही मिला था अब तक ।समीर ने खुद को घर मे कैद कर रखा था ।अब वो आयत से भी नही मिलता था ,वैसे भी उसने कई बार आयत को फ़ौजी रनवीर शेखावत से मिलते देख लिया था ।उसका दिल बुरी तरह टूट चुका था ।



जब समीर ने 3 दिन दुकान नहीं खोली तो आयत उसके पास जाने का फैसला किया, मुखिया जी ने मना भी किया था कि इस वक्त हालात ठीक नहीं है वह कहीं भी ना निकले लेकिन किसी से बिना बताए वह चुपचाप घर से निकाल पडी , समीर की दुकान थोड़ा दूरी पर पड़ती थी । वह दुकान तक पहुंची ही थी कि वाकई में वही हुआ जिसका डर था । वापस गोलीबारी शुरु हो गयी थी । कही भी छुपने की जगह नहीं थी उसके पास । वही जमीन पर लेट गई वो । कैसे भी कर कर वो थोड़ा आगे बढ़ी । शरीर छील रफा था पर खुद को गोलियों से बचाते हुए समीर की दुकान तक पहुंच गई। दुकान के शटर पर तो ताला लगा ।



आयत पिछले दरवाजे के पास पहुंच गई। किस्मत से पिछले दरवाजे की कुंडी लूज थी । थोड़ी सी ही कोशिश के बाद वह खुल गया । आयत को अचंभा हुआ कि समीर इतना गैरजिम्मेदार कैसे हो सकता है लेकिन उसने ध्यान दिया कि वहां पर 2 दरवाजे थे और शायद समीर अंदर वाला दरवाजा बंद करना भूल गया था खैर आयत ने दरवाजा बंद किया । उसके पैरों मे बहुत दर्द हो रहा था । दरसल गोलियों से बचने के लिये वो जमीन पर घुटनो और कुह्नियों से रेंग्ती हुई आई थी जिसकी वजह से उसके घुटने में चोट लग गई थी ।



अपनी शाल से खुद को पोंछती हुई वह अंदर की ओर बढी । वो अन्दर पहुंची भी नही थी की उसे दूर से दो तीन लोगों के बात करने जैसी आवाज आई । उसे कुछ समझ में नहीं आरहा था लेकिन उसे ऐसा भी लगा जैसे कहीं रेडियो और वॉकी-टॉकी की आवाज आ रही है ।



आयत का दिमाग तमाम बुरी आशंका से भर उठा था । वो वही रखे चीनी के बड़े बोरों के पीछे छुप कर धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी । उसने देखा कि समीर सर पर हाथ रखे बैठा हुआ है उसके आगे दो और लोग बैठे हुए हैं और रेडियो रिपोर्टिंग कर रहे है । उनकी बातों से साफ पता चल रहा था की समीर उनकी सहायता करने के लिए और ठिकाना प्रोवाइड करने के लिए तैयार हो गया है । आयत को समीर पर बहुत गुस्सा आया लेकिन फिलहाल उसने खामोश रहना ही उचित समझा । थोड़ी ही देर बाद वो दोनो शख्स उठ कर चले गए और जाते-जाते उन्होंने समीर को एक कागज और कुछ पैसे भी दिए जो जाने क्यू दिये थे ।



उन लोगों के जाने के बाद समीर ने दोनों दरवाजे बंद किया और अपनी जगह पर बैठ कर जैसे राहत की सांस ली हो । लेकिन जैसे उसने आंखें खोली तो कयामत उसके सामने खड़ी हुई थी जो जलती आंखों से उसे देख रही थी ।



समीर -- तुम यहां कैसे आई ?






आयत -- नहीं आती तो तुम्हारा असली चेहरा कभी नहीं दिखता गद्दार कहीं के।



समीर -- कैसा गद्दार ? किस गद्दारी की बात कर रही हो तुम ।


आयत-- देश के गद्दार। मक्कार कहीं के जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो। जो देश रहने के लिए अपनी जमीन दे रहा है , अपना आसमान दे रहा है उसके साथ गद्दारी करते हो , शर्म आनी चाहिए तुमको खुद पर । तुम तो इस दुनिया में रहने के लायक नहीं यहाँ तक कि तुम जिंदा रहने के लायक नहीं हो ।


समीर -- सही कह रही हो तुम । मैं जिंदा रहने लायक नहीं हूं । मैं इस दुनिया में रहने लायक नहीं हूं क्योंकि मुझ में अपने भाई तो को बचाने की शक्ति नहीं है । मैं इतना कमजोर और नाकारा हूं कि अपने भाई जिसका हाथ मेरे हाथों में सौंप कर मेरे मां बाप गए थे उसको भी ना सम्हाल सका ।



आयत -- तो क्या अपने भाई का बदला तुम दूसरों के भाइयों को मार कर लोगे? अपने भाई का बदला तुम दूसरों के पिता की जान ले कर लोगे , अपने भाई का बदला दूसरों का घर उजाड़ कर लोगे ,यह कैसा न्याय है ?



समीर -- तुम्हारी मैं बहुत इज्जत करता हूं इसका मतलब यह नहीं कि तुम कुछ भी बकती चली जाओ मैं सुन लूंगा मेरी बात समझने की कोशिश करो ।



आयत --क्या समझू मै समीर और क्यू समझू कुछ भी । मैने अपनी आंखों से जो देखा और कानो से जो सुना उस पर क्यू ना यकीं करु ।



समीर -- कभी कभी आंखों से देखा और कानों से सुना भी गलत हो जाता है ।


आयत -- ये पट्टी किसी और को जाकर पढ़ाना समीर । तुम जैसे 10 को एक बार में नाकों चने चबवा सकती हूं ।



समीर --जानता हूं इसीलिए तो मुझे और कैप्टन रणवीर शेखावत को साथ में घुमा रही थी ।

रणबीर का नाम सुनकर आया आयत गुस्से से तिलमिला उठीं ।




आयत -- खबरदार से जो अपनी घटिया जबान से रणवीर का नाम लिया । तुम उसका नाम अपनी जबान से छूने के भी काबिल नहीं हो । तुम जैसे गिरा हुआ इंसान अपनी जबान से उनका नाम लेकर उनका नाम गंदा नहीं कर सकता है ।



समीर -- बड़ी गहरी मोहब्बत है तुम्हें उनसे ।



आयत -- है मोहब्बत ! ऐसी मोहब्बत है जिसे अल्लाह भी खत्म नहीं कर सकता है , बहुत गहरी मोहब्बत है और तुम जैसा कमजर्फ मोहब्बत को समझ भी नहीं सकता है क्यों सही कहा ना ।




समीर -- हां सही कहा मैं क्यों समझूंगा। मैने थोडी ना किसी से मुहोब्बत की है ।




आयत -- वैसे वह लम्बा वाला आदमी तुमको क्या देकर गया था ।



समीर -- अपने काम से काम रखो तुमसे क्या मतलब मुझे कौन क्या देकर गया था।


आयत -- समीर मेरी बात समझने की कोशिश करो और सहयोग करो। बताओ वो क्या देकर गया था यह जानना मेरे लिए बहुत जरूरी है ।




समीर -- क्यों अपने यार को देना है क्या ?



आयत को समीर की बात इतनी बुरी लगी कि उसने खींचकर एक तमाचा उसके मुह पर जड़ दिया । समीर को भी गुस्सा आ गया उसने आयत को धक्का दिया तो वो जमीन पर गिर गयी ।


समीर -- एक बात याद रख तुझसे मोहब्बत नहीं होती तो शायद जान से मार देता , लेकिन मजबूर हूं ।

समीर ने दांत पीसते हुये कहा ।




आयत -- तुम जैसे इंसान से मोहब्बत कोई कर भी नहीं सकता है।

समीर आयत को देखता रह गया जब उसने अपने कश्मीरी कुर्ते की जेब से रेवोल्वर निकाल कर समीर पर तान दी ।समीर के पैर कांपने लगे ।


समीर -- क कौन हो तुम ?



आयत -- इससे तुमको क्या मतलब तुम्हारी औकात नहीं कि तुम मेरे बारे में जान सको । उस आदमी ने तुम्हारे हाथ में जो भी दिया है मेरे हवाले करो वरना मेरी एक गोली से तुम्हारे दिमाग के परखच्चे उड़ जायेंगे।



समीर-- वाह रे भगवान चलो अच्छा है तुम्हारे हाथों मरने में बड़ा सुकून मिलेगा।



आयत -- नहीं दोगे तो कागज ,


समीर -- नहीं ,



आयत -- अगर तुम कागज दे दो तो मैं वादा करती हूं कि बंटू को छुड़ा लाऊंगी ।

बंटू का नाम सुनकर समीर की आंखों में आंसू आ गया ।आयत ने कमजोर नस पकड़ ली थी समीर की । समीर कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक आयत की तरफ से बीप बीप की आवाज आने लगी । समीर इस तरह की आवाज से अच्छी तरह परिचित था । वह बौखला कर आयत का चेहरा देखने लगा और आयात ने अपने जेब से एक माइक्रोफ़ोन जैसी चीज निकालकर उससे वह उसने बात करना शुरू किया और शुरुआत कुछ इस तरीके से थी कि समीर के पैरों के जमीन से जमीन खिसक गई ।



आयत -- कैप्टन विशाखा शेखावत रिपोर्टिंग सर ।

समीर को तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था ,वो पास में ही बैठी चेयर पर पसर गया । सिर पर हाथ रखे आयत को देखने लगा जितना उसे समझ में आ रहा था वह इतना तो समझ गया था की आयत भी सेना की कोई अधिकारी है और वह शायद उस शेखावत की कोई रिश्तेदार है इसीलिए इतना चिढ़ जाती थी उसकी बात पर। आयत की बात कंप्लीट हो जाने पर समीर ने बोला ,



समीर -- तो तुम्हारा नाम आयत नहीं है?



आयत -- नहीं मेरा नाम आयत नहीं है । मेरा नाम कैप्टन विशाखा शेखावत है और जिस रणवीर शेखावत की तुम बात कर रहे हो वह मेरे सगे बड़े भाई हैं ।



समीर -- कितना बड़ा धोखा किया तुमने हम लोगों के साथ ।



आयत -- कोई धोखा नहीं किया है ।कर्जदार हो तुम लोग सेना वालों के । अगर हम सेना वाले 1 सेकंड के लिए पीछे हट जाएं जो तुम्हारी सांसे रुक जाएंगी । तुम लोगों को शांति देने के लिए हम लोग 24 घंटे अशांति में जीते हैं । तुमको पता है हम लोगों को गोलियों की आवाज की आदत पड़ जाती है शांति तो हमें जैसे खलने लगती है लेकिन फिर भी तुम लोग कुछ भी समझने को तैयार नहीं होते हो ।


समीर -- मेरे बंटू को छुड़ा लाओ प्लीज।



आयात -- तुम से बार बार कह रही हूं वह कागज मेरे हवाले कर दो मैं वादा करती हूं कि मैं अपनी जान पर खेल कर बन्टू को खोजूंगी ।

समीर को भी समझ में आ चुका था की आयत की बात मनाने के सिवा उसके पास कोई चारा नहीं बचा है क्योंकि उसकी आंखों से ही पता चल रहा था कि वह कितनी खूंखार है अपने फर्ज अदायगी के मामले में । समीर ने सारे डाक्यूमेंट्स उसके हवाले कर दिया और जितना पता था सब बता दिया आयत को । डाक्यूमेंट्स देखकर आयत की आंखों में बहुत चमक उभर आया ।



आयत -- बहुत-बहुत शुक्रिया तुम्हारा ।
जल्दी ही बंटू तुम्हारे पास होगा पर सॉरी जब तक मिशन पूरा नहीं हो जाता तुम्हें मेरा बंदी बनकर रहना होगा ।


समीर -- जिंदगी भर बंदी रख बनकर रहने के लिए तैयार हो तुम्हारा बस बंटू को लेते आओ ।


आयत -- जिंदगी भर के फैसले हम नहीं लेते हैं । हम सिर्फ आज की बात करते हैं और अपने देश के भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास करते हैं । हमारे पास हमारे लिए वक्त नहीं होता है ।

आयत की बातो को सुन समीर नत मस्तक हो गया ।



समीर -- तो क्या तुमने मुझे कभी प्यार नही किया था ?

कोई जवाब नहीं दिया आयत ने समीर की बात का और लैपटॉप लेकर बैठ गई । अब उसका मकसद जानकारी को आलाधिकारियों तक पहुंचाना और बंटू को सही सलामत वापस लाना था ।
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15 &16 दिसम्बर 2017 -- ( A )







समीर आयत के हाथ को बांधे उसे बेरहमी से घसीटता हुआ पहाड़ी वाली गुफा के अंदर घुस गया । बार बार समीर से नकाब पौश आदमी ढेरों सवाल पूंछ रहे थे । बहुत ही ज्यादा कड़ी सुरक्षा थी वहां पर लेकिन समीर को उन्ही दोनो आदमियों की वजह से गुफा मे प्रवेश मिल गया था जो समीर के घर पर आये थे , आज भी उनकी ही मदद से समीर यहाँ तक पहुंच गया था । गुफा के द्वार पर ही समीर और आयत की तलाशी ली गयी । वो भी बेहद अलग तरीके से । अत्याधुनिक मशीने उपरी ही नही शरीर के अन्दर भी स्केनींग कर रही थी । दोनो के पास से कुछ भी नही मिला तो उनको अन्दर जाने की इजाज़त मिल गयी परन्तु समीर आयत को अन्दर ले जाने से पहले उसे बांधना नही भूला और बेहद नफरत से भर कर उसे घसीटकर ले जा रहा था ।



आयत के चेहरे पर दुपट्टे का नक़ाब पड़ा हुआ जो उसके आम कश्मीरी नागरिक होने की गवाही दे रहा था । चारों तरफ फैला घना अन्धेरा खौफनाक रात की भयानकता और बढ़ा रहा था । बर्फ की मोटी चादर ओढ़े वादियां हड्डियों को गला देने वाली ठंड की वजह से सुनसान पडी थी । वैसे भी पडोसी मुल्क की सरहद पर था ये ठिकाना तो कोई प्रश्न ही नही उठता था किसी के आने जाने का ।


गुफा के और अंदर घुसते ही जैसे गुनगुना एहसास होने लगा जिस्म को । आयत को यकीन नहीं हो रहा था अपनी आंखों पर , उसने सोचा भी नही था कि समीर जहां पर लेकर जा रहा है वहां का नजारा अंदर से ऐसा हो सकता है । बाहर से बंजर और अंदर से फाइव स्टार होटल से कम नहीं था यहाँ तक की ac और ब्लोवेर का भी उचित तापमान मौजूद था ।



बिजली की सुविधा , आधुनिक उपकरणों की सुविधा , छोटा सा हॉस्पिटल जैसा रूम, छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक / IT रूम जिसमे कम से कम नहीं तो 50 लैपटॉप रखे हुए थे। कानों में हेडफोन चढ़ाएं न जाने कितने लोगों अपनी को अंजाम देने में लगे हुए थे,देख कर ही पता चल रहा था की ये सब हैकर्स हैं जो ना जाने कहां पर सेंध लगने की कवायद मे जुटे हुये थे ।



समीर उन दोनो आदमियों मे ही आयत को घसीटता हुआ एक बड़े से कक्ष में लेकर पहुंचा । ये कमरा शायद गुफा का सबसे सुरक्षित कमरा था । इस कमरे तक पहुंचने के लिये गुफा के बाकी सारे कमरों से होकर आना ही एक मात्र विकल्प था । चारों ओर हाई पॉवर कैमेरा लगे हुये थे जो कमरे मे और कमरे के बाहर होने वाले हर एक हलचल को कैद कर रहे थे ।



कमरे के बीचों बीच वहां पर एक बड़ी सी कुर्सी पर एक खतरनाक सा दिखने वाला शख्स बैठा हुआ था । अन्धेरे की वजह से उसके चेहरे को देख पाना सम्भव नही था हाँ पर उसकी लम्बाई चौड़ाई का अंदाजा आसानी से लगया जा सकता था । उसके चारों तरफ कम से कम 50 बंदूकधारी तैनात थे ।



समीर ने आयत को धकेल दिया उसके सामने ,वो बिचारी लडखडा कर जमीन पर गिर पड़ी । समीर के धक्का देते ही आयत कुछ इस तरह उठी की वो उस अन्धेरे मे बैठे शख्स के थोडा पास पहुंच गयी । उस शख्स को सभी आका बोल रहे थे ।




आका -- ये कौंन है और तेरी हिम्मत कैसे हुई हमे खोजने आने की । तेरी इस गुस्ताखी की सज़ा मे तुझे मौत भी नसीब हो सकती थी ।

उस आका की रूह को कंपा देने वाली सर्द सी आवाज शांत कमरे के हर एक कोने में गूंज गई । बेहद खौफनाक और दबंग आवाज़ थी । एक बार को तो समीर का कलेजा मुंह को आ गया लेकिन फिर उसने आयत की तरफ देखा और बोलना शुरू किया।




समीर -- ऐसा मत बोलो भाई । बड़े पापड़ बेलने पड़े हैं आप तक पहुंचने के लिये ।मेरा भाई आप के पास है । आज शाम जब आपके लोग आये थे तब ये मैडम छिप कर सब सुन ली थी । शायद ये सेना की जासूस है । इसने बड़ी होशियारी से मुझे बंदी बना लिया था लेकिन मौका पढ़ते ही मैंने इसके गर्दन पर एक कंटाप दिया और घसीट लाया इनको ।

समीर की आंखों में डर साफ झलक रहा था जबकि आयत अपना सिर झुका कर बैठी हुई थी। बार फिर उस आका की दहाड़ कमरे में गूंज उठी ।




आका-- वाह समीर बहुत अच्छा काम किया है । तुमने दिल खुश कर दिया। मुखबिर हो तो तुझ जैसा । इस सोने की चिड़िया के बदले तो हम अपने कई आदमियों को छुड़वा सकते हैं। बोलो तुम्हें क्या चाहिए?



समीर -- मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मेरे बंटू को छोड़ दीजिए ।



आका-- ठीक है पर अभी 2 दिन और लगेंगे । 2 दिन तुम भी यहां पर रुक जाओ । ज़लजला आने वाला है । उसके बाद सबको सब मिल जायेगा ।



समीर -- आप बंटू को छोड़ दीजिए ना उसे लेकर कहीं दूर चला जाऊंगा किसी से भी नही मिलूंगा ।



आका -- ऐसा कुछ नहीं होगा क्योंकि यहां पर सिर्फ आने का रास्ता है । तुम लोगों के लिए वापस जाने का नहीं । सोचा तो था कि सिर्फ बन्टू मरेगा लेकिन बड़ा गहरा गहरा प्रेम है तुम दोनों भाइयों में । तुम दोनों ही मरोगे ।



समीर -- यह तो धोखा है ।

अभी समीर अपना रोना रो ही रहा था कि अचानक एक बंदूकधारी ने आका के कान में कुछ कहा तो वह दहाड़ उठा । सभी को बाहर तैनात होने के लिए बोल दिया और चिल्लाकर बोला ,



आका -- इन सालो की हड्डी पसली तोड़ डालो । यह साले अपने साथ सेना वालों को लेकर आए हैं ।


आका के इतना कहने के साथ ही सारे के सारे आयत और समीर पर कहर बन कर टूट पड़े
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Thanks dear roman me b likh doongi abhi to ye poori likhi huyi hai devnagri me
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Thanks
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